MERI SALI AUR BIWI-Hindi Sex Stories-Antarvasna-Kamukta

MERI SALI AUR BIWI-Hindi Sex Stories-Antarvasna-Kamukta Hi friends G han aj ki kahani hai meri apni shadi shuda Sali k sath sex enjoyment ki, meri Sali nabila meri wife ki chooti behen hai us ski age qariban 35 se 36 sal hai shadi shuda hai 2 bacchay hain kia kamal ki cheez hai uss ka … Continue reading MERI SALI AUR BIWI-Hindi Sex Stories-Antarvasna-Kamukta

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Uncle ne rape kar meri seal todi-Sex Stories-Antarvasna-Kamukta

Uncle ne rape kar meri seal todi-Sex Stories-Antarvasna-Kamukta Sabina Adeeb Hiii Frnds I am sabina adeeb 22yer from lucknow up se bilong karti hu Meri hieght 5’2inc hai Figure 32’30’32. Hai Rang gora hai mai smart aur hasmukh ladki hu Mai apko apni pahli chudai ki kahani batane wali hu Jo aaj se 4 sal … Continue reading Uncle ne rape kar meri seal todi-Sex Stories-Antarvasna-Kamukta

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jija ne mujhe mast choda-Sex Stories-Antarvasna-Kamukta

jija ne mujhe mast choda-Sex Stories-Antarvasna-Kamukta eri pehli aur sacchi haqiqat hai,Mera naam Sumaina hai, Mai 24 Saal Ki shadi shuda Khubsurat ladki hu, Mere Size 30,26,30 hai,Hum log Chotey Shehar say hai, Mere shadi hue 8 mahine huvey hai aur mai aur mere husband ney bacha deri sey paida karney ka plan kiye hai, … Continue reading jija ne mujhe mast choda-Sex Stories-Antarvasna-Kamukta

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Bhabhi aur Bhabhi ki behan ko choda-Hindi Sex Stories-Antarvasna-Kamukta

Bhabhi aur Bhabhi ki behan ko choda-Hindi Sex Stories-Antarvasna-Kamukta Mere dost ka naam Vinod sharma hai. Wo kasauli me ek purane bungle ki dekh bal aur khana pakane ka kaam karta hai. Ye bungla angrezo ne banwaya tha ab ye chandigarh ke ek ameer pariwaar ke paas hai wo sabhi america rehte hai is liye … Continue reading Bhabhi aur Bhabhi ki behan ko choda-Hindi Sex Stories-Antarvasna-Kamukta

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खुशबू के जिस्म को गुलाम बनाया

खुशबू के जिस्म को गुलाम बनाया khushaboo ke jism ko gulaam banaaya दोस्तों में उस समय सिर्फ 21 साल का था और मेरे कुछ दोस्त हॉस्टल में रहते थे। तो बाद में उन लोगों ने एक तीन बेडरूम वाला फ्लेट किराए पर ले लिया था जिसमें मैंने भी उस फ्लेट का किराया देने में उनकी … Continue reading खुशबू के जिस्म को गुलाम बनाया

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और उन्हें गोदी में लेकर चोदने लगा

>दोस्तों वक़्त इंसान से कुछ भी करवा सकता है | इस बात का अंदाजा मुझे अभी कुछ दिनों पहले ही हुआ है | मैं २४ वर्षीय युवक हूँ | अविवाहित हूँ तो शायद इसीलिए दिमाग में हमेशा एक ही चीज़ रहती है- सेक्स |
मैं १८ साल का था जब मेरे सबसे छोटे चाचा की शादी हुई | मुझे शायद इस शादी से कोई फर्क नहीं पड़ता अगर मेरी चाची इतनी ख़ूबसूरत और गठीली न होती | उनके आते ही सारे परिवार में उनकी खूबसूरती के चर्चे तेजी से फैलने लगे थे | मुझे आज भी याद है कि कैसे मैं उन्हें देखकर उनके बारे में सोचता रहता था- किस तरह मैं उनका चुम्बन करूँगा, वो बिना कपड़ों के कैसी लगेंगी, अगर मैं उनकी नंगी कमर पर हाथ रखूँगा तो वो क्या करेंगी.. वगैरा वगैरा … इन्हीं सब ख्यालात के साथ मैं हमेशा चाची क बारे में सोचता रहता था। इन सभी बातों को अब काफी अरसा बीत चुका है और इस दौरान चाची की ज़िन्दगी में कुछ ऐसा हो गया जो नहीं होना चाहिए था | इतनी ख़ूबसूरत बीवी मिलने के बावजूद चाचा किसी और के चक्कर में लग गए और चाची और अपनी छोटी बेटी को छोड़कर चले गए | यह बात कुछ महीने पहले की ही है | यह सब होने के बाद चाची और उनकी बेटी की ज़िम्मेदारी मेरे पापा ने उठाई और उन्हें अपने साथ रहने के लिए कहा | चाची जी को हमारे घर का ऊपर वाला कमरा दे दिया गया | इस दौरान कभी मेरे दिमाग में ऐसा कोई ख्याल नहीं आया कि मैं चाची के साथ ऐसा कुछ करूँ | आप यह कहानी altsexstories.नेट पर पढ़ रहे है | लेकिन अभी कुछ दिनों पहले ही दिल्ली में बहुत तेज़ बारिश हुई | पापा बिज़नेस के काम से बाहर गए हुए थे और माँ भी नानी के घर पर थी | चाची की बेटी भी स्कूल में थी | ऐसे में मैं घर पर अकेला था, न जाने क्यूँ मेरा दिल हुआ कि आज बारिश में नहाया जाए |  मैं नहाने के छत पर पहुंचा तो देखा चाची भी बारिश के मज़े ले रही थी | न जाने क्यूँ मेरी नज़र उनके पेट पर गई, जोकि कपड़े गीले होने बाद साफ़ नज़र आ रहा था | शायद मेरे ख़यालात थोड़े बदल से रहे थे | मुझे देखते ही चाची ने अपने आपको थोडा संभाला और कहा- काफी दिनों बाद इतनी अच्छी बारिश हुई है | मैंने पूछा- आपको शायद बहुत अच्छा लगता है बारिश में नहाना | तो उन्होंने कहा- हाँ नहाना भी, बारिश में नाचना भी.. इस बात पर मैंने हंसते हुए बारिश का कुछ पानी उनके मुँह पर फैंका तो उन्होंने भी बदला लेने के लिए ऐसा ही किया.. देखते ही देखते हम दोनों एक दूसरे के साथ बारिश में ही खेलने लगे। फिर ना जाने कैसे अचानक चाची का पाँव फिसला और वो सीधी मेरे ऊपर आकर गिरी | उन्हें गिरने से बचाने के लिए मैंने अपने दोनों हाथों से उन्हें पकड़ना चाहा तो मेरे हाथ उनकी कमर पर रुके लेकिन हम दोनों ही नीचे गिर पड़े | चाची मेरे ऊपर थी और मेरे हाथ उनकी कमर पर, वो लम्हा मेरी ज़िन्दगी का सबसे मुश्किल लम्हा था | पता नहीं क्यूँ मेरे हाथों ने कमर पर से हटने की बजाय अपनी पकड़ और मज़बूत कर ली | हम दोनों की आँखें एक दूसरे की आँखों में ही देख रहे थे और मुझे उन आँखों में कोई रुकावट नज़र नहीं आ रही थी | शायद इसीलिए मैंने उनकी नंगी गर्दन पर चूम लिया | वो थोड़ा घबराई और उठने की कोशिश करने लगी, मगर मेरी पकड़ काफी मजबूत थी, मैंने एक करवट ली और अब मैं उनके ऊपर था। यह सब कुछ खुली छत पर तेज़ बारिश में हो रहा था | बारिश का पानी हम दोनों के बदन को गीला कर चुका था.. लेकिन तब भी मैं उनके बदन की गर्मी को महसूस कर सकता था | मेरी आँखें उनकी आँखों में ही देख रही थी, मेरे हाथ उनके दोनों हाथों को संभाले हुए थे, मेरे पैर उनके पैरों में लिपटे हुए थे | आप यह कहानी altsexstories.नेट पर पढ़ रहे है | हम दोनों के बदन एक दूसरे से सटे हुए थे | मैंने उन्हें और चूमना शुरू किया, उनकी गर्दन पर, उनके होठों पर | अब उनका ऐतराज़ करना भी बंद हो चुका था, लेकिन वो खामोश ही थी | मेरे हाथों ने उनके बदन पर चलना शुरू किया, मेरा एक हाथ उनके पेट पर था और दूसरा उनकी गर्दन पर | तभी मैंने अपने हाथ से उनकी सलवार के कमरबंद को ढीला कर दिया और उनकी सलवार को बदन से अलग कर दिया | उनकी केले जैसी चिकनी जांघ देखकर मैं पागल सा होने लगा था, मैंने उन्हें चूमना शुरू कर दिया और तभी मैंने चाची की पहली कराह सुनी- आआआआअह्ह्ह्ह्ह्ह | वो अपने हाथ से मेरे सिर को पीछे धकेलने लगी.. मैंने दोनों जाँघों को हाथ में पकड़ कर कमर पर चूमना शुरू किया और धीरे धीरे उनकी कमीज़ को भी उतार दिया | !अब एक ऐसा नज़ारा मेरे सामने था जिसके लिए मैंने हजारों मन्नत की थी.. चाची का गोरा चिकना गठीला बदन मेरी आँखों के सामने था और वो भी उस हालत में जिसमें मैं सिर्फ सोच सकता था.. उन्होंने अपनी आँखों को बंद कर लिया | उन्होंने काली ब्रा और पैंटी पहनी हुई थी.. जोकि उनके गोरे बदन के ऊपर और भी खूबसूरत लग रही थी।मैंने उनकी छाती पर हाथ फेरना शुरू किया और उनकी कड़क चूचियों को दबाने लगा.. अब शायद उन्हें आजाद करने का समय आ गया था। मैंने उनकी ब्रा का हुक खोल कर उन्हें भी आजाद कर दिया.. उनकी चूचियों को देखकर मैं मदहोश सा हो रहा था.. मैंने उन्हें चूसना शुरू किया तो चाची सिसक उठी.. उनकी सिसकियाँ अब तेज़ होती जा रही थी | उनकी आआआआआआआआआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह आआआअह्ह्ह्ह्ह् सुनकर मुझे एक अलग सी ताक़त मिल रही थी | आप यह कहानी altsexstories.नेट पर पढ़ रहे है | मेरे हाथ उनके पूरे बदन पर चल रहे थे.. और तभी मैंने हाथ उनकी पैंटी के अन्दर घुसा दिया और वो जैसे पागल सी हो गई.. मेरी एक ऊँगली ने उनकी पैंटी के अन्दर हरकत शुरू कर दी थी.. उनके दोनों हाथ मेरी कमर को खरोंच रहे थे.. अब तक उन्होंने भी मुझे कपड़ों से अलग कर दिया था और मेरे बदन पर सिर्फ मेरा अंडरवियर ही बचा था | तभी उन्होंने अपने नाज़ुक हाथों से मेरे लण्ड को पकडा और उसे सहलाने लगी.. मैं पागल हो रहा था.. यह सभी कुछ हम बारिश में गीली छत पर ही कर रहे थे और मुझे लगा काम को आखिरी अंजाम देने के लिए हमे बेड पर जाना ही पड़ेगा..मैंने चाची को उसी हालत में उठाया और अंदर उनके कमरे के बेड पर लिटा दिया.. वो बुरी तरह सिसक रही थी.. लेटते ही मैंने उन्हें बुरी तरह चाटना शुरू किया और एक झटके में उनकी पैंटी उतार दी.. मैंने उन्हें जोर से जकड़ लिया .. उनकी चूचियों को मसलते हुए मैंने अपना लण्ड उनकी दरार में घुसा दिया.. वो थोड़ा सा चिल्लाई, मगर फिर अपने आपको सँभालते हुए उनके हाथों ने मेरे चूतडों को दबाना शुरू किया | | उनकी इस हरक़त से मुझे काफी जोश मिला और मैंने झटके लगाने और तेज़ कर दिए.. झटके लगाते लगाते वो मुझे काट रही थी, मुझे जकड़ रही थी.. सिसकियाँ ले रही थी.. मैंने भी बुरी तरह से उनकी चूचियों को मसलना शुरू कर दिया.. वो बिलकुल पागल हो चुकी थी.. बार बार अपनी गांड उचका रही थी.. मैं खड़ा हो गया और उन्हें गोदी में लेकर चोदने लगा.. वो भी उछल उछल कर मेरा पूरा साथ दे रही थी.. और लगभग पाँच मिनट बाद मेरा ज्वालामुखी फूटा और उनकी दरार ने भी पानी छोड़ दिया.. हम लोग नन्गे बदन काफी देर तक एक दूसरे के ऊपर पड़े रहे.. और चूमते रहे.. यह सिलसला आज भी जारी है.

बहुत मजा आयेगा मेरी रानी तुझे चोदने मे

दोस्तों आज मै जो कहानी लिखने जा रहा हूँ ये घटना बस इसी होली की है. ७ साल के बाद मै होली मे अपने घर पर था. मेरी उम्र २० साल की है. मै अपने शहर से बहुत दूर एक कॉलेज मे तकनीकि की पढाइ कर रहा हु. किसी कारण कॉलेज एक महीने के लीये बन्द हो गया था. सारे त्योहारो मे मुझे ये होली का उत्सव बिलकुल पसन्द नहीं है. मै ने पहले कभी भी होली नही खेला. पिछले ७ साल मै ने होस्टल मे ही बिताया. मेरे अलावा घर मे मेरे बाबुजी और मां है. मेरी छोटी बहन का विवाह पिछले साल हो गया था. कुछ कारण बस मेरी बहन सरिता होली मे घर नही आ पायी. लेकिन उसके जगह पर हमांरे दादाजी होली से कुछ दिन पहले हमांरे पास हमसे मिलने आ गये थे. दादा कि उम्र करीब 61-62 साल है, लेकिन इस उम्र मे भी वे खुब हट्टे कटःठे दिखते थे. उनके बाल सफेद होने लगे थे लेकिन सर पर पुरे घने बाल थे. दादा चश्मा भी नही पहनते थे. मेरे बाबुजी की उम्र करीब 40-41 साल की होगी और मां कि उम्र 34-35 साल की. मां कहती है कि उसकी शादी 14 वे साल मे ही हो गयी थी और साल बितते बितते मै पैदा हो गया था. मेरे जनम के 2 साल बाद सरिता पैदा हुयी . अब जरा मां के बारे मे बताउ. वो गाव मे पैदा हुयी और पली बढी. पांच भाइ बहन मे वो सबसे छोटी थी. खुब गोरा दमकता हुआ रंग. 5’5” लम्बी, चौडे कन्धे , खुब उभरी हुयी छाती, उथा हुआ स्तन और मस्त, गोल गोल भरे हुये नितम्ब. जब मै 14 साल क हूआ और मर्द और औरत के रिस्ते के बारे मे समझने लगा तो जिसके बारे मे सोचते ही लौडा खडा हो जाता था वो मेरी मां सुनीता ही है. मैने कई बार सुनीता के बारे मे सोच सोच कर मुठ मांरा होगा. लेकिन ना तो कभी सुनीता का चुची दबाने का मौका मिला ना ही कभी उसको अपना लौडा ही दिखा पाया. इस डर से क़ि अगर घर मे रहा तो जरुर एक दिन मुझसे पाप हो जायेगा , 8 वी क्लास के बाद मै जिद्द कर होस्टल मे चला गया. मां को पता नहीं चल पाया कि इकलौते बेटे का लौडा मां कि बुर के लीये तड़पता है. छुट्टियो मे आता था तो चोरी छिपे सुनीता की जवानी का मज़ा लेता था और करीब करीब रोज रात को मुठ मांरता था. मै हमेशा ये ध्यान रखता था कि मां को कभी भी मेरे उपर शक ना हो. और मां को शक नही हुआ. वो कभी कभी प्यार से गालो पर थपकी लगाती थी तो बहुत अछा लगता था. मुझे याद नही कि पिछले 4-5 सालो मे उसने कभी मुझे गले लगाया हो. आप यह कहानी altsexstories.नेट पर पढ़ रहे है | अब इस होली कि बात करे. मां सुबह से नास्ता , खाना बनाने मे व्यस्त थी. करीब 9 बजे हुम सब यानी, मै , बाबुजी और ददाजी ने नास्त किया और फिर मां ने भी हुम लोगों के साथ चाय पिया. 10-10.30 बजे बाबुजी के दोस्तो का ग्रूप आया . मै छत के उपर चला गया. मैने देखा कि कुछ लोगों ने मां को भी रंग लगाया. दो लोगों ने तो मां की चुत्तरो को दबाया, कुछ देर तो मां ने मजा लिया और फिर मां छटक कर वहा से हट गयी. सब लोग बाबुजी को लेकर बाहर चले गये . दादाजी अपने कमरे मे जाकर बैठ गये.
फिर आधे घंटे के बाद औरतो का हुजुम आया. करीब 30 औरते थी. हर उम्र की. सभी एक दुसरे के साथ खुब जमकर होली खेलने लगे. मुझे बहुत अछा लगा जब मैने देखा कि औरते एक दुसरे का चुची मसल मसल कर मजा ले रही है..कुछ औरते तो साया उठा उठा कर रंग लगा रही थी. एक ने त0 हद्द ही कर दी. उसने ने अपना हाथ दूसरी औरत के साया के अन्दर डाल कर बूर को मसला. कुछ औरतो ने मेरी मां सुनीता को भी खुब मसला और उनकी चुची दबाइ. फिर सब कुछ खा पीकर बाहर चली गयी. उन औरतो ने मां को भी अपने साथ बाहर ले जाना चाहा लेकिन मां उनके साथ नही गई. उनके जाने के बाद मां ने दरवाजा बन्द किया . वो पुरी तरह से भींन्ग गई थी. मां ने बाहर खडे खडे ही अपना साडी उतार दिया. गीला होने के कारण साया और ब्लौज दोनो मां के बदन से चिपक गया था. कसी कसी जांघे , खुब उभरी हुई छाती और गोरे रंग पर लाल और हरा रंग मां को बहुत ही मस्त बना रहा था. ऐसी मस्तानी हालत मे मां को देख कर मेरा लौडा टाइट हो गया. मैने सोचा , आज अछा मौका है. होली के बहाने आज मां को बाहों मे लेकर मसलने का. मैने सोचा कि रंग लगाते लगाते आज चुची भी मसल दुंगा. यही सोचते सोचते मै नीचे आने लगा. जब मै आधी सीढी तक आया तो मुझे आवाज सुनाइ पडी, आप यह कहानी altsexstories.नेट पर पढ़ रहे है | ददाजी मां से पुछ रहे थे, “ विनोद कहाँ गया…” ”मांलुम नही, लगता है, अपने बाप के साथ बाहर चला गया है.” मां ने जबाब दिया.
मां को नही मांलुम था कि मै छत पर हूं और अब उनकी बाते सुन भी रहा हूं और देख भी रहा हूं. मैने देखा सुनीता अपने ससुर के सामने गरदन झुकाये खडी है. दादाजी, मां के बदन को घूर रहे थे. तभी दादाजी ने मां के गालो को सहलाते हुये कहा, मेरे साथ होली नही खेलोगी?

एक झटके में बुवा की चूत भोसड़ा बन गयी

हैल्लो फ्रेंड्स.. मेरा नाम रितेश है और मेरी उम्र २४ साल है और में एक बार फिर से आप सभी के सामने मौजूद हूँ अपनी एक नई कहानी लेकर.. दोस्तों यह मेरी लाईफ की एक सच्ची घटना है जो मेरी बुआ की चुदाई स्टोरी है | यह घटना अभी कुछ साल पहले की है। दोस्तों जब मेरी उम्र १९ साल थी और मेरी क्लास में एग्जाम चल रहे थे। मेरी बुआ हमारे ही शहर में रहती है उनका घर हमारे घर से कुछ ही दूरी पर था। आप यह कहानी altsexstories.नेट पर पढ़ रहे है | तो अब में आप सभी को अपनी बुआ के बारे में बताता हूँ। दोस्तों मेरी बुआ 40 साल की हैं और उनकी शादी को 12 साल हो गये हैं और उनका एक 10 साल का बच्चा भी है। उनका फिगर 32-26-34 है। उनकी हाईट 5’4 इंच है उनका बहुत गौरा कलर है और बालों का कलर काला और वो दिखने में बहुत सुंदर है.. वो ज़्यादातर साड़ी पहनती है। यह घटना गर्मी के महीने की है जब मेरे मम्मी, पापा मेरे मामा की बेटी की शादी में चेन्नई गये हुए थे और वो मुझे जाने से पहले मेरी बुआ के घर पर छोड़कर गये और उन्होंने उनसे मेरा ख़याल रखने को कहा। मेरी बुआ को में बहुत पसंद था क्योंकि बुआ मुझसे अपनी सारी समस्या शेयर करती और में उनकी सभी बातें ध्यान से सुनता था। फिर में उनके घर रात के 10 बजे मम्मी, पापा को रवाना करके पहुँचा और ड्राईवर से कहा कि गाड़ी यहीं पार्क कर दो। फिर में गाड़ी की चाबी लेकर अंदर चला गया आज वहाँ पर केवल बुआ और बुआ का बेटा रक्षित था।
मै : बुआ फूफाजी कहाँ हैं?
बुआ : बेटा वो कुछ दिनों के लिए बिजेनस टूर पर गये हैं।
मै : चलो फिर तो अच्छा हुआ में यहाँ पर आ गया.. अब आपको भी अकेले डर नहीं लगेगा।
बुआ : हाँ ठीक है तुम आराम से रहो।
बुआ : मम्मी, पापा को अच्छे से छोड़ आया?
मै : हाँ बुआ छोड़ आया।
बुआ : वो लोग कब तक वापस आएँगे?
मै : वो 4 दिन बाद लोटेंगे।
बुआ : तूने कुछ खाया है कि नहीं?
मै : हाँ बुआ मैंने डिनर कर लिया है।
बुआ : पक्का कुछ खाना है तो बोल दे।
मै : जी नहीं बुआ मुझे कुछ नहीं खाना।
फिर हम लोगो ने थोड़ी देर टीवी देखी और थोड़ी इधर उधर की बातें की और फिर रक्षित को नींद आ रही थी तो बुआ ने रक्षित को बेड पर सुला दिया। फिर कमरे का गेट बंद करके बुआ बोली
बुआ : चल दूसरे कमरे में आजा में कपड़ो पर प्रेस कर लेती हूँ और हम वहीं पर बैठकर बात कर लेंगे।
मै : ठीक है चलो।
फिर बुआ जैसे ही प्रेस करने बैठीं तो उनका पल्लू सरक गया और मुझे उनकी छाती दिखी.. वाह क्या नज़ारा था? यह देखकर मेरा तो लंड खड़ा हो गया। बुआ के बूब्स बहुत बड़े नहीं थे.. लेकिन बहुत ही अच्छे थे और बुआ प्रेस करते करते मुझसे बोली कि..
बुआ : तुझे बुरा लग रहा होगा ना कि गर्मियों के केम्प की वजह से तू नहीं जा पाया।
बुआ मेरा गाल सहलाते हुए बोली कि कोई बात नहीं अब 2 महीने बाद सुमित की शादी है उसमे मस्ती कर लेना सारी कसर निकाल लेना। आप यह कहानी altsexstories.नेट पर पढ़ रहे है |
मै : स्माईल पास कर दी.. हाँ बुआ मुझे तो सब से मिलना और घर वालों के साथ बहुत मस्ती करनी है।
बुआ : मैंने तेरे जीजाजी की फोटो देखी बहुत सुंदर हैं और उनकी जोड़ी बहुत अच्छी है।
मै : हाँ बात करने में भी अच्छे हैं और अमिर भी हैं बिल्कुल अपने स्टॅंडर्ड के।
फिर में बुआ के पास गया और उन्हें गले लगाकर चुप करने लगा और कहने लगा कि मुझे पता है कि बुआ अपनी शादीशुदा लाईफ से खुश नहीं हैं और कितनी बार दादी जी को तलाक के लिए बोलती रहती हैं.. लेकिन मेरी दादी नहीं मानती फूफाजी बहुत गरीब फेमिली से हैं और कमाते वगेरह अच्छे हैं और खुले मिजाज के भी हैं.. लेकिन शराबी हैं और रोज़ दारू पीकर घर आते हैं और एक बार तो उन्होंने दारू पीकर बुआ पर हाथ भी उठाया था। फिर बुआ ने भी मुझे कसकर पकड़ लिया और ज़ोर ज़ोर से रोने लगी। में बुआ को चुप करा रहा था.. लेकिन साथ ही साथ उनको गले लगाने पर मेरे शरीर में करंट भी दौड़ रहा था। तो मुझसे अब कंट्रोल नहीं हो रहा था। फिर मैंने बुआ का चेहरा ऊपर उठाया और उनके आंसू पोंछे।
मै : बुआ ऐसे आदमी के लिए रोकर क्या फ़ायदा जिसकी नज़र में आपकी कोई कीमत नहीं.. लेकिन बुआ अभी भी रो रही थी।
बुआ : तुझे नहीं पता रितेश कितना बुरा लगता है जब किसी का पति उस पर बिल्कुल ध्यान नहीं देता। तू अभी बच्चा है और तू नहीं समझेगा कैसा दर्द होता है।
मै : बुआ में समझता हूँ आपको क्या चाहिए? यह कह कर मैंने बुआ को किस करने की कोशिश की बुआ ने मुझे दूर किया और चिल्लाकर कहा।
बुआ : क्या बदतमीज़ी है यह?
मै : बुआ यह कोई बदतमीज़ी नहीं आपकी खुशी है जो फूफाजी आपको नहीं देते।
बुआ : क्या तू पागल हो गया है?
फिर यह बोलकर बुआ पलटी और अपने बेडरूम की तरफ जाने लगी। तो मैंने बुआ की कमर पीछे से पकड़ ली और कहा। आप यह कहानी altsexstories.नेट पर पढ़ रहे है |
मै : बुआ हर खुशी पर सबका बराबर हक़ होता है और अगर फूफाजी आपको यह खुशी नहीं देते तो इसका मतलब यह नहीं है कि आप इस खुशी की हक़दार नहीं.. आपको भी सेक्स का पूरा हक़ है।
फिर बुआ मेरी तरफ पलटी और चौंककर मेरी तरफ देखने लगी.. क्योंकि मैंने पहली बार उनके सामने सेक्स जैसा शब्द काम में लिया था। फिर मैंने बुआ का चहरा पकड़ा और उनकी आँखों में झाँककर कहा।
मै : बुआ मेरा इसमे क्या स्वार्थ आप तो मेरी गर्लफ्रेंड्स के बारे में सब जानती हैं ना और में उनमे से किसी के भी साथ सेक्स कर सकता हूँ और मेरी आपके साथ सेक्स की बात यह आपकी खुशी के लिए है अब आप ही समझो।
बुआ : नहीं यह ग़लत है रितेश.. यह बिल्कुल ग़लत है। आप यह कहानी altsexstories.नेट पर पढ़ रहे है | फिर मैंने बुआ की बात बिना सुने उनके होंठो पर अपने होंठ रख दिए और किस करने लगा। पहले बुआ थोड़ा हिचकिचा रही थी.. लेकिन धीरे धीरे वो भी मेरा साथ देने लगी और अब हम दोनों एक दूसरे के होंठ चूस रहे थे और दोनों वैसे ही किस करते करते पास के रूम में चले गये और फिर मैंने बुआ को बेड पर लेटा दिया दूसरे रूम में.. उसमे नहीं जिसमे रक्षित सो रहा था। फिर मैंने मेरी टी-शर्ट निकाली और जीन्स उतारी और साईड में रख दी। फिर में बुआ के ऊपर चढ़ गया और हम एक बार फिर से किस करने लगे.. में किस करते करते बुआ का सीधा बूब्स दबाने लगा.. अहहा मज़ा आ गया.. बुआ के क्या मुलायम बूब्स हैं। फिर मैंने बुआ का ब्लाउज उतारा। बुआ ने काली ब्रा पहनी हुई थी। बुआ के बूब्स को किस करता हुआ में नीचे जाने लगा और फिर मैंने बुआ के पूरे शरीर को किस किया और वापस ऊपर आते हुए मैंने बुआ के पेटिकोट का नाड़ा खोला और उसे धीरे धीरे नीचे सरका दिया। आप यह कहानी altsexstories.नेट पर पढ़ रहे है | फिर मैंने बुआ की पेंटी के ऊपर से ही उनकी चूत पर हाथ फेरना शुरू कर दिया और बुआ धीरे धीरे आवाज़ें करने लगी। बुआ ने मेरा हाथ पकड़ा और मुझे अपनी तरफ खींचा और में फिर से अपना चेहरा बुआ के चहरे के पास ले गया और हम फिर लिप किस करने लगे। इस बार तो बहुत ही लम्बी किस की ऐसा लग रहा था मानो मेरी जीभ उनकी जीभ से लड़ रही हो 10 मिनट तक यूँही किस करने के बाद में बुआ के बूब्स की तरफ ध्यान देने लगा। पहले तो मैंने उन्हें ब्रा के ऊपर से बहुत दबाया और फिर एक साईड से ब्रा को थोड़ा हटा दिया उनके निप्पल भूरे कलर के थे। में अब उनके निप्पल चूस रहा था और मुझे बहुत मज़ा आ रहा था और मेरा लंड तो मानो जैसे मेरी अंडरवियर फाड़ कर बाहर आना चाहता हो। में अब उनके बूब्स चूस रहा था और बीच बीच में काट भी रहा था। मेरी बुआ धीरे धीरे आवाज़ें कर रही थी.. अहह हुम्म अफ हुम्म यह आवाज़ें मुझे और पागल बना रही थी। फिर बुआ ने खुद ही अपनी ब्रा निकाल दी और मेरे मुहं को अपने बूब्स पर ज़ोर ज़ोर से दबाने लगी 10 मिनट तक उनके बूब्स दबाने और चूसने के बाद में नीचे उनकी चूत की तरफ गया और उनकी पेंटी उतारने लगा। तो उन्होंने मेरा हाथ पकड़ लिया और कहा।
बुआ : नहीं यह बिल्कुल ग़लत है।
मै : क्या ग़लत है बुआ बताओ मुझे?
बुआ : में तेरे साथ यह सब नहीं कर सकती।
में : बुआ हमने इतना सब कुछ तो कर ही लिया है अब आपको क्या अचानक यह सब ग़लत लगने लगा?
बुआ : नहीं रितेश.. बस अब नहीं।
मै : बुआ खून करो या खून करने की कोशिश सज़ा तो एक ही मिलती है अगर यह सब ग़लत नहीं था तो सेक्स क्यों ग़लत है अब मत रोको बुआ मुझे.. लेकिन बुआ मना करने लगी और मुझे लगा कि जल्दी कुछ ना किया तो यह मौका तो हाथ से गया। मैंने तुरंत बुआ के बूब्स पकड़े और उन्हें ज़ोर से दबाने लगा। में फिर से बुआ के ऊपर चढ़ गया और अब उन्हें लिप किस कर रहा था। जब बुआ का ध्यान किस में था तो मैंने मौका पाकर बुआ की पेंटी सरका दी.. लेकिन बुआ ने मेरा हाथ फिर पकड़ लिया.. लेकिन इस बार में बुआ की एक नहीं चलने देने वाला था और थोड़ी सी कोशिश के बाद मैंने बुआ की पेंटी को उतार दिया.. वाह क्या नज़ारा था? बुआ की बालों से भरी चूत ठीक मेरे सामने थी और में उसे देखकर पागल हुआ जा रहा था। फिर मैंने अपनी बीच वाली ऊँगली बुआ की चूत में डाल दी और अंदर बाहर करने लगा बुआ की चूत बहुत गीली हो चुकी थी और बुआ सिसकियाँ भरने लगी.. आह आह आह उफ्फ्फ। मैंने बुआ की चूत सूँघी तो क्या खुश्बू थी कसम से गुलाब भी ऐसा मदहोश नहीं कर सकता जैसी उनकी चूत की खुश्बू ने मदहोश कर दिया था। फिर मैंने मेरी अंडरवियर उतारी और आख़िर कार मेरा 6 इंच का लंड आज़ाद हो गया और शिकार को बेताब था.. में अब बुआ के ऊपर आ गया और अपने लंड को उनकी चूत पर रगड़ने लगा था। आप यह कहानी altsexstories.नेट पर पढ़ रहे है |
बुआ : नहीं रितेश मत कर प्लीज छोड़ दे मुझे.. यह सब बहुत गलत है।
मै : बुआ अब मत रोको मुझे.. आज जी भरकर चोदने दो।
बुआ : प्लीज मुझे बहुत दर्द होगा।
मै : हाँ बुआ आप तो ऐसे कह रही हो जैसे पहली बार चुद रही हो और में अपना काम करने लगा। मैंने बुआ की एक ना सुनी और मैंने फिर बुआ के होठों पर अपने होंठ रख दिए और उन्हें किस करने लगा। 2-4 किस के बाद उनके होंठ चाटते हुए मैंने एक ज़ोरदार झटका लगाया और मेरा आधा लंड अंदर चला गया और बुआ बहुत जोर से चीख उठी आ माँ मरी प्लीज धीरे दर्द हो रहा है। आप यह कहानी altsexstories.नेट पर पढ़ रहे है |
मै : बुआ धीरे चिल्लाओ वरना रक्षित उठ जाएगा.. यार आप तो सच में ऐसे चिल्ला रही हो जैसे पहली बार चुद रही हो।
बुआ : रितेश दर्द हो रहा है जल्दी बाहर निकाल प्लीज।
मै : कुछ नहीं होगा आपको.. शांत रहो। अभी तो मज़ा शुरू भी नहीं हुआ है।
फिर में थोड़ी देर वैसे ही पोज़िशन में रहा और फिर बुआ के नॉर्मल हो जाने पर धीरे धीरे धक्के लगाने लगा। फिर कुछ मिनट बाद मैंने एक और ज़ोर का धक्का मारा और मेरा पूरा का पूरा लंड अब बुआ की चूत में था बुआ एकदम से हिल गयी और उन्होंने मेरी पीठ पर नाख़ून गड़ा दिए और में बुआ को धक्के लगाने लगा। पहले धीरे धीर और फिर उनकी रफ़्तार बढ़ाता गया। बुआ भी अब सेक्स का मज़ा ले रही थी और सिसकियाँ भर रही थी.. उफ़ अफ उऊँ आह.. पूरा कमरा ठप ठप की आवाज़ से भर गया था। ठप ठप ठप की आवाज के साथ साथ में बुआ के बूब्स भी दबाता और उन्हें किस भी करता। बुआ के सीधे हाथ को मैंने टाईट पकड़ा हुआ था। करीब 10 मिनट ऐसे ही चोदने के बाद बुआ ज़ोर से चिल्लाई अह्ह्ह ओह्ह्ह और एक लंबी साँसे लेते हुए बेड पर शांत होकर गिर गयी।
मै समझ गया था कि बुआ झड़ चुकी है और में भी थोड़ी देर वैसे ही रहा। बुआ ने मुझे एक लम्बा लिप किस किया और मैंने फिर से धक्के लगाने शुरू कर दिए। बुआ ने अपने दोनों पैर मेरी कमर से लपेट दिए में भी अब झड़ने वाला था। तो मैंने अपने धक्के और तेज़ कर दिए और दो मिनट बाद में भी झड़ गया। फिर मैंने बहुत ज़ोर से अपना लंड आखरी धक्के से बुआ की चूत में डाला और बहुत देर तक वैसे ही डाले रखा। हमने फिर एक दूसरे को किस किया और में बुआ के ऊपर ही गिर गया.. लेकिन सच कह रहा हूँ उस दिन तो में इतना झड़ा जितना कि में मुठ मारने में तो कभी भी नहीं झड़ा। बुआ की चूत से मेरा वीर्य बाहर टपक रहा था.. लेकिन हम दोनों इस बात की चिंता किए बीना एक दूसरे से चिपक कर सो गये । दोस्तों प्लीज मुझे कमेंट कर जरुर बताना मेरी कहानी कैसी लगी

मौसी की कामुक लड़की

>मेरा नाम मुकेश है और मैं पंजाब का रहने वाला हु antarvasna antarvassna Indian Sex Kamukta Chudai Hindi Sex Stories मेरे घर में मेरे माँ डेड और मैं हु. अभी तो मैं जॉब करता हु, बट ये जो कहानी है वो २०१० की है, जब मैं स्कूल में था. मेरी जून की छुट्टिय आने वाली थी और मेरे विलेज में शादी थी. मेरे माँ डेड नहीं जा रहे थे, तो मैं अकेला ही यूपी निकल गया. पहले बार अकेले ट्रेन में सफ़र कर रहा था. मुझे उन दिनों सेक्स करने का बहुत शौक था.. मेरा दिल बहुत करता था. मेरे सभी दोस्तों की गर्लफ्रेंड थी, सब मजे लेते थे. लेकिन मैं अभी तक सिंगल ही था. इस बार मैंने सोच रखा था, कि कोई ना कोई लड़की को पटाना है. मैं अपने मामा के यहाँ गया और वहां मेरे एक दूर के मामा की शादी थी, शादी में सब लोग आये हुए थे. और एक – एक माल लड़की भी आई हुई थी.

शादी का फंशन चल रहा था, मैंने बहुत ट्राई किया वहां आई लडकियों पर. मैं इस लाइन में नया था. इसलिए मुझे लडकियों को पटाने का सही तरीका नहीं आता था. ऐसे शादी बीत गयी और एक भी लड़की को मैं पटा नहीं पाया. अब मैं बोर होने लगा था, तो मामा ने कहा, कि गाँव वाले घर में चले जा, नाना – नानी के पास. वो लोग वहां अकेले ही रहते है. मैंने कहा – मैं अकेले क्या करूँगा वहां? तभी मेरी मौसी वहां आई और उन्होंने कहा, कि तेरी छोटी बहन यहीं मौसी की लड़की जो हॉस्टल में थी आ रही है ५ -६ दिनों के लिए. तू उसे भी अपने साथ गाँव ले जा. मौसी की लड़की का नाम कुकी है और हम दोनों गाँव आ गये. वहां पर मैं सब से मिला और १ दिन गुजर गया. मैं उदास था, क्योंकि इस बार भी मैं एक भी लड़की को नहीं पटा पाया और अभी तक कुछ भी नहीं कर पाया था. कुकी हर वक्त मेरे साथ ही रहती थी और खेलती रहती थी. वो मुझ से काफी छोटी थी.

अगले दिन मैं बाहर बैठा हुआ था, तभी मेरा ध्यान कुकी की तरफ गया. उसने ब्लैक कलर की टॉप और रेड कलर की शॉर्ट्स पहनी हुई थी. वो बहुत ही सेक्सी लग रही थी. मैंने उसके छोटे – छोटे बूब्स देखे, जो टॉप्स के ऊपर से साफ़ दिख रहे थे. यह कहानी देसीएमएमस्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे रहे । उसकी गांड और टाँगे भी मस्त दिख रही थी. मैंने सोचा, कि कुकी भी तो लड़की है.. चाहे छोटी है, लेकिन है तो लड़की ही. कुकी बहुत सुंदर थी और एकदम गोरी. बस मैंने उस वक्त प्लं बनाया, कि ये ही सही मौका है. क्योंकि हमारा गाँव का घर बहुत बड़ा है और सिर्फ नाना – नानी ही वहां रहते है. अब मैंने कुकी की चुदाई करने का मन बना लिया था. अगले दिन जब कुकी नहा रही थी, तो मैं उसको चुपके से देख रहा था. वो एकदम नंगी थी और उसकी गांड बहुत ही सेक्सी थी.. चूत बहुत छोटी सी थी एकदम सील बंद और बूब्स छोटे – छोटे थे.

वो तैयार होकर आई और मेरे साथ बैठ गयी. मैंने प्लानिंग की हुई थी पहले से ही, कि मुझे क्या करना है और कुकी को कैसे गरम करना है? मेरे मोबाइल में उस वक्त सेक्स क्लिप पड़ी हुई थी. उस वक्त नोकिया के कैमरे वाले मोबाइल चले ही थे. वो मेरे मोबाइल पर रोज़ गाने सुनती थी और आज मैंने जान कर उसको विडियो का फोल्डर करके दे दिया. उसने वो क्लिप प्ले कर दी और देखने लगी. वो शरमा रही थी. मैंने कहा – क्या हुआ? उसने कहा – ये सब क्या है? मैंने कहा – ये सब सेक्स का खेल होता है. जोकि एक लड़का और लड़की मिलकर खेलते है. इस मैं बहुत मज़ा आता है. वो चुप रही और फिर मैंने कहा, कि बड़े लोग खेलते है इसे सिर्फ. लेकिन बच्चे भी इसको चुपचाप छुप – छुप कर खेल सकते है. मैं उसको एक कमरे में लेकर गया और अपना लंड निकाल कर दिखाया. वो देख रही थी और शरमा भी रही थी. मैंने कहा – इसको लंड कहते है. अब चलो तुम दिखाओ.. तो वो हसने लगी और मैंने कहा – तुम्हारे पास लंड नहीं है. जो तुम्हारे पास है उसको चूत कहते है.

मैंने उसकी पेंट उतारी और उसको बेड पर लिटा दिया और फिर उसकी कच्छी उतार दी. मेरे सामने एक छोटी बच्ची की चूत थी. मैं उसको चूसने लगा और वो डर रही थी. तभी किसी के आने की आवाज़ आई और मैंने उसको कपड़े पहनाये और चला गया. मैं बाज़ार गया और कंडोम ले आया. रात हो गयी थी और हम रोज़ रात को नीचे सोते है और आज मैंने नाना – नानी से कहा, कि आज रात हम दोनों ऊपर वाले कमरे में सोने वाले है और फिर मैं कुकी को लेकर ऊपर वाले कमरे में चले गया. रात होने का इंतज़ार किया. उसको भी नीद नहीं आ रही थी. मैंने कहा – चल चुदाई वाला खेल खेलते है. उसने भी हाँ में सिर को हिला दिया. रात हो गयी थी. मैंने बेडरूम का दरवाजा बंद किया और पूरा नंगा हो गया. अब मैंने उसके कपड़े भी उतारने चालू कर दिए और वो कुछ भी नहीं बोल रही थी. उसने वाइट कलर की कच्छी पहनी हुई थी. मैंने उसका टॉप उतारा और कुकी के बूब्स को अब मैं चूसने लगा. कुकी भी आँखे बंद करके मजे ले रही थी.

अब मैं उसकी चूत को चाट रहा था और उसकी चूत में से पानी निकल रहा था. कुकी के साथ किस्सिंग स्टार्ट की और मैं उसके होठो को चूस रहा था. मैंने उसको अपना लंड चूसने को बोला, तो वो डरने लगी. फिर उसने थोड़ा सा लंड चूसा और हम दोनों अब एकदम पति – पत्नी की तरह सेक्स कर रहे थे. मानो की किसी का डर ना हो. फिर मैंने अपने लंड पर कंडोम चड़ाया और उसकी चूत पर तेल लगाया. और फिर मैंने उसकी चूत में अपना लंड डालना शुरू किया. कुकी की चूत बहुत ही छोटी सी थी और बहुत ज्यादा टाइट थी. मैंने बड़े आराम से धीरे – धीरे अपना लंड कुकी की चूत में डाला. उसको पहले ही बोला दिया था, कि दर्द होगा. तू चीखना मत. उसको दर्द हो रहा था. मेरा आधा लंड उसकी चूत में जा चूका था और वो बोल रही थी. भैया बस करो.. और नहीं… मैंने कहा – अभी तो चुदाई शुरू भी नहीं हुई है. अब मैंने और थोड़ा जोर से धक्के मार कर कुकी की चुदाई शुरू की. मैंने अब अपने लंड को अन्दर बाहर करना शुरू किया. क्या बताऊ दोस्तों, कितना मज़ा आ रहा था.

साथ – साथ में, मैं अपनी छोटी बहन के बूब्स भी चूस रहा था. फिर मैं ने पोजीशन चेंज की बट हम दोनों को ही सेक्स कोई एक्सपीरियंस नहीं था. इसलिए एक ही पोजीशन में सेक्स कर रहे थे. मैं झड़ गया था और फिर उसको किस करता रहा. मैंने कंडोम निकाल दिया और फिर सेक्स करने लगा. कुकी की गांड भी मारने की कोशिश की. पर नहीं कर पाया. फिर मैंने कुकी को टेबल पर लिटा दिया और खूब चोदा. मेरा लंड बिलकुल अन्दर तक जा चूका था और मुझे लग रहा था, कि मेरा लंड उसकी चूत में फस चूका है. यह कहानी देसीएमएमस्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे रहे ।लेकिन मैंने अपनी गांड का पूरा जोर लगा दिया और अपने लंड को मस्ती में अन्दर बाहर कर रहा था. अब वो भी शांत कर अपनी गांड हिला रही थी और मस्ती में मेरे धक्को का जवाब अपनी गांड को हिलाकर दे रही थी. उसकी आवाज़े और सिस्कारिया पुरे कमरे में गूंज रही थी और मस्ती में उसका मचलता हुआ शरीर मेरा जोश बड़ा रहा था. मैंने उसको मस्ती में पकड़ा हुआ था और मैं उसके कामुक गरम अंगो को मसल रहा था और उसको चोद रहा था. मैंने उसकी गांड पर भी अपना लंड रखा और एक धक्का मारा. लेकिन उसकी गांड उसकी चूत से भी ज्यादा टाइट थी और १० मिनट की कोशिश के बाद भी जब मैं अपना लंड अन्दर नहीं घुसा पाया, तो उसकी गांड मारने का विचार त्याग दिया और उसकी चूत पर ही टूट पड़ा.

मैंने पूरी रात जमकर उसकी चुदाई की और फिर हम ऐसे हो सो गए. सुबह जब उठे, तो हमारी पहली सुहाग रात पूरी हो चुकी थी. हमने कपड़े पहने और मैं वहां ४ दिन रहा और मैंने कुकी की रोजाना चुदाई की. फिर हमने एक दुसरे को अलविदा कहा और उसकी समझा दिया, कि हम दोनों के बीच जो भी हुआ, वो किसी को मत बताना. फिर लास्ट इयर २०१४ में फेसबुक पर मुझे मिली और मैंने उसकी फोटो देखी. वो और भी सेक्सी हो गयी थी. मैंने उसको फ़ोन किया और उससे मुझे लगा, कि वो सब कुछ भूल गयी है. लेकिन उसे सब कुछ याद था और अब उसका बॉयफ्रेंड भी है और वो उसके मजे लेता है और उसकी चुदाई भी करता है. उसने मुझे कहा, कि मैं ही उसका पहला सेक्स टीचर हु और उसे मेरे साथ किया सेक्स का हर लम्हा याद है और वो उस लम्हे को फिर से जीने के लिए तड़प रही है. अब वो दिल्ली में स्टडी कर रही है और इस साल मैं उस से फिर से मिलने जा रहा हु. वो फिर से मेरे साथ सेक्स करने के लिए तैयार है. दोस्तों, वो कहानी मैं आपको फिर कभी जरुर बताऊंगा.

चार किरायेदार लड़कियों ने जिगोलो बनाया-3

मेरी कहानी का तीसरा भाग है एक दिन शांती और शिखा ने मुझसे पूछा की जीजू हमारी एक सहेली और उसकी भाभी को आपका लंड चाहिए तो क्या आप उन दोनों को चोदना चाहोगे? क्योंकी हमने जब आपके महाबली लंबे और मोटे लंड के बारे में बताया की आपके लंड में बहुत ताक़त है और आपका वीर्य भी बहुत स्वादिष्ट है इसलिए हमने आपके बारे में अपनी सहेली और उसकी भाभी को बता दिया तब से उन दोनों की चूत खुजा रही है| मैंने कहा ठीक है| शिखा, शांती, मोनिका और शालू के साथ क्लास में कई लड़कियां पढ़ती थी जो चारों की सहेलियां भी थी उन्ही में से एक थी काजल| एक दिन मैं सुबह के समय जब सोकर उठा तो मेरे फ़ोन पर एक कॉल आई और मैंने बात की उधर से एक लड़की की आवाज आई की मैं काजल बोल रही हूँ कमला नगर से| मैंने कहा जी कहिये मैं क्या कर सकता हूँ आपके लिए? तो उसने कहा की मैं आपसे मिलना चाहती हूँ |मैंने कहा बताइये कहाँ मिलना है? तो वो बोली आज अभी 10 बजे तक आ जाओ और अपना पता मुझे नोट करवा दिया| मैंने अपनी बाइक उठाई और सीधा उसके दिये हुए पते पर पहुँच गया | आप यह कहानी altsexstories.नेट पर पढ़ रहे है | मैंने कॉलबेल जब बजाई तो गेट खोलने के लिए एक छोटी सी बच्ची आई तो मैंने उससे पूछा की मुझे काजल जी से मिलना है तो उसने कहा की आप यहाँ बैठिये मैं उन्हें अभी बुलाती हूँ| करीब 5 मिनट इंतज़ार करने के बाद काजल आई| उसने मुझसे बैठने के लिए कहा एयर चाय कॉफी के लिए पूछा|मैंने कहा की आप मुझसे क्या बात करना चाहती थी जिसके लिए आपने मुझे यहाँ बुलाया है तो उसने तुरंत अपनी भाभी ऋतंभरा को आवाज दी थोड़ी देर बाद ऋतंभरा भी आ गई तो काज़ल ने मेरा परीचय ऋतंभरा से शालू के जीजू के रूप में करवाया और बताया की मेरी भाभी महीला मंडल व्यापर परकोष्ठ की सदस्या हैं| मैंने उनसे पुछा की घर के बाक़ी सदस्य कहाँ हैं तो काजल ने बताया की भैया बिजनेस के सिलसिले में एक महीने के लिऐ अमेरिका और जापान गए हैं|मैंने पूछा क़ी आपके यहाँ किस चीज़ का बिजनेस होता है? तो बताया की हमारी 10-12 कंपनियों का ग्रुप है जिनमें से कुछ आगरा में हैं और कुछ फरीदाबाद में हैं|जिनमें से आगरा वाली फॅक्टरयिओं को भैया भाभी देखते हैं और फरीदाबाद वाली फॅक्टरयिओं को पापा सँभालते हैं| ऋतंभरा ने मुझसे पूछा की विशु जी, जैसा की मुझे आपके घर में रहने वाली चार लड़कियों ने बताया की आपका हथियार बहुत लंबा और मोटा है और काफी देर बाद ढेर सारा बीज उगलता है ? और हम दोनों मिलकर आपके लंड का प्रचार करें तो हमने उन चारों से यही कहा की हम कैसे माने की उसके लंड में बहुत दम है| अगर वाकई उसके लंड में दम है तो वो हमें एक बार अपने लंड का डेमो दे | यदि पसंद आया तो आगे तो रेफर करुँगी अन्यथा नहीं|मैंने मन ही मन सोचा की ये लड़कियां मेरा कितना खयाल रखती हैं मेरे लंड के लीये क्लायेंट ढूंढ रही हैं और मुझे पता भी नहीं| खैर मैंने ऋतंभरा से पूछा की आपको कैसा डेमो चाहिए तो उसने मुझसे डायरेक्टली कहा की पहले हमें अपना लंड दिखाओ|मैंने भी देर न करते हुए तुरंत अपनी पेंट की ज़िप खोलकर अपना लंड खोलकर ऋतंभरा के हाथ में पकड़ा दिया कुछ देर में ही फीमेल के हाथ का स्पर्श पाकर वो जल्दी ही लोहे की रॉड की तन गया और उसका सुपाड़ा फूल के बहुत मोटा हो गया| जब लंड अपनी असली रंगत पर आया तो ऋतंभरा और काजल की आँखों में गुलाबी सी चमक आ गई|कुछ देर वो मेरे लंड के ऊपरी खाल को दो उंगली और एक अंगूठे के सहारे से आगे पीछे करने लागी| करीब 20 मिनट तक जोर जोर से हिलाने पर भी बीज नहीं निकला बल्कि उसका हाथ हिलाते हिलाते थक गया और दर्द करने लगा|तो उसने मुझसे पूछ लिया की तुम्हारा बीज कीतनी देर बाद निकलेगा तो मैंने कहा की अभी आप और 20 मीनट तक भी हिलाओगी तो भी मेरा बीज नहीं निकलेगा|ये मेरा वादा है आपसे तो ऋतंभरा को कहना ही पड़ा की विशु जी,वाकई आपके लंड में बहुत दम है ये तो चूत या गाँड के परखच्चे उड़ा सकता है|लेकिन विशू जी एक बात का विशेष ध्यान रखना मान की चलो अभी आप जवान हो इसलिए आपके लंड में बहुत जान है लेकिन जब रोज़ाना लड़की को चोदोगे तो तुमारा लैंड कमज़ोर हो जायेगा और एक समय वो आएगा की तुमसे तुम्हारी घरवाली भी तुम्हें घास नहीं डालेगी | आप यह कहानी altsexstories.नेट पर पढ़ रहे है | क्योंकि लड़की या औरत उस लड़के या आदमी से खुश रहती है जो उसकी चूत का भुर्ता बना दे|इसलिए सोच लो की तुम्हें खुद से ज्यादा इसका ध्यान रखना पड़ेगा मैंने कहा बात तोह सही है|मैं इसका हमेशा ध्यान रखूँगा| मैं ऋतंभरा और काजल से बात कर ही रहा था दरवाजे की घंटी बजी|मेरी तो डर के मारे गाँड फट गई|मैंने झट से अपना लंड पेंट के अंदर किया पर वह बैठने के बजाय और ज्यादा फूल गया|देखा रोह पता चला की कोई शरारती बालक था जो घंटी बजाकर भाग गया था|ऋतंभरा ने कहा की विशू जी क्या मैं आपके लंड को प्यार कर सकती हूँ? वैसे तो मैंने आज तक किसी का भी यहाँ तक की अपने पती तक का लंड मैंने नहीं चूमा है क्योंकि मेरे पती का लंड मुश्किल से 4.5-5″ का पतला सा है लेकिन आपका तो मुझे ये दूना लग रहा है| मैंने कहा ठीक है और अपना लंड पैंट से दुबारा निकाल लिया तो काजल ने ऋतंभरा से इशारों में कहा भाभी जब हमें कीमत ही देनी है तो इनको पूरा नंगा करो ऋतंभरा ने काजल की बात मानते हुए मुझसे बोली की विशु जी यदि आप बुरा न मानें तो हम आपका पूरा शरीर नंगा देखना चाहते हैं|मैंने कहा ठीक है देख लो कहकर मैंने अपने सभी कपड़े उतार दीये|काजल एकदम चिल्लाकर बोली भाभी इनके लंड के साथ साथ पोते भी कितने बड़े हैं|और मेरे पोते टटोलने लगी जो बीज से फुल थे|ऋतंभरा ने मेरा लंड झट से मुह में ले लिया और काजल ने पोते|दोनों ही ऐसे ही चूस रही थीं जैसे जनम जनम की प्यासी हो|मैंने ऋतंभरा के मुँह से तुरंत ही लंड बाहर निकाला और कहा की अगर आपको मेरा लंड चूसना है तो आप लोगों को भी कपड़े उतारने होंगे|ऋतंभरा ने झट से कहा हम क्यों उतारें? आपको जरूरत है आप उतारिये|मैंने भी फुर्ती से दोनों को नंगी कर दिया|आये हाय क्या बदन था ऋतंभरा का उसके सामने बैचलर लड़कियाँ फेल नज़र आ रही थी क्योंकि उसके चूचे एकदम तने हुए गोल और उसकी कमर एकदम स्टाइलिश सुराही के समान, उसकी चूत जिस पर हलके हलके भूरे रंग के रोंये थे मैं तो सकते में आ गया की पता नहीं ये शादीशुदा है अब तक कुँवारी है|मैंने ये जानने के लिए उसकी चूत में ऊँगली डाली तो मेरी पूरी ऊँगली चली गई फिर मैंने दो ऊँगली डाली तो दो भी चली गई|उसके बाद जैसे ही मैंने तीन उंगली डाली तो ऋतंभरा की हलकी सी चीख निकल गई|मैं समझ गया की इसने बहुत ही छोटे लंड से चुदवाया है|उसके बाद मैं उसे गोद में उठाकर बिस्तर पर ले गया फिर मैंने उसे बेतहासा चूमना शुरू कर दिया|सबसे पहले मैंने उसके होंठ, गाल, गर्दन और पेट को बारी बारी से चूमा फिर उसके बाद मैंने उसके कान के पास पीछे की ओर किश किया और डायरेक्ट उसके चुचों पर आ गया जिसे मैं एक हाथ से दबाने लगा और दूसरे हाथ से मुँह में लेकर चूसने लगा|कुछ देर बाद ऋतंभरा ने मेरा मुँह अपने चुचों पर दबा दिया और सिसियाने लगी|इधर काजल देख देख कर ही बिना हाथ लगाये गरम हो गई और मेरा लंड चूसने लगी जिससे मेरा लंड बहुत ज्यादा टाइट हो गया और काजल के मुँह में आसानी से नही घुस पा रहा था इसलिए वो सिर्फ सुपाड़े की ऊपरी खाल को हटाकर जीभ से चाट रही थी फिर धीरे धीरे मैं ऋतंभरा की चूत पर आ गया और अपनी जीभ को नुकीला करके उसके क्लीटोरियास को चाटने लगा जैसे ही मैंने अपनी जीभ ऋतंभरा की चूत पर रखी तो वह एकदम ऐसे सिहर गई जैसे उसे 1000 वाट का करंट लगा हो और फिर उसकी चूत में तीन उंगली डालकर आगे पीछे करने लगा | आप यह कहानी altsexstories.नेट पर पढ़ रहे है | मैंने करीब इस क्रिया में 15 मिनट लिए होंगे की ऋतंभरा का बदन हिचकोले खाने लगा इसके साथ ही वो मेरे सर को अपनी चूत पर दबाने लगी कुछ समय पश्चात उसका शरीर ऐठनें लगा और वो आह आह करते हुए मेरे मुँह पाए झड़ गई लेकिन फिर भी मैं लगातार उसकी चूत चाटता रहा| कुछ देर बाद ऋतंभरा फिर से गरम हो गई और मुझसे कहने लगी की विशु जी अब बर्दास्त नहीं हो रहा है मुझे इतना क्यों तड़पा रहे हो? अब डाल भी दो अपना मूसल जैसा लंड|मैंने भी देर न करते हुए ऋतंभरा की टाँगो के बीच आ गया और अपने लंड को ऋतंभरा की चूत पर रगड़ने लगा|और सही वक्त देखकर लंड को छेद पर टेक कर एक पूरी ताकत के साथ करारा सा झटका लगा दिया जिससे ऋतंभरा की एक जोरदार चीख निकल गई|लेकिन मैंने उसकी कोई परवाह न करते हुए लगातार 5-6 धक्के पूरी ताकत के साथ लगाये जिससे ग्राउंड फ्लोर पर काम करने वाली नौकरानी भागी भागी आई और उसने मेरे द्वारा की जा रही ऋतंभरा की चुदाई देखने लगी|चुदाई देखते देखते वो भी अपने सभी कपडे उतार कर मैदान में कूद पड़ी और कहने लगी भाभी मैं भी चुदना चाहती हूँ|जब पूरा लंड ऋतंभरा की चूत में घुस गया तो मैं थोड़ी देर के लिए रुक गया और धीरे धीरे धक्के लगाने लगा जैसे ही ऋतंभरा का दर्द कुछ कम हुआ तो मैंने अपना लंड ऋतंभरा की चूत से सुपाड़े तक पूरा बहार खींचकर दुबारा पूरी ताकत के साथ धकेल दिया इधर ऋतंभरा ने भी नीचे से कूल्हे मटकाना शुरू कर दिया|ऋतंभरा को ज्यादा मज़ा आये इसलिए मैंने उसकी टाँगे अपने कंधे पर रख ली जिससे मेरा पूरा लंड उसकी चूत में घुस रहा था इस कारण वो जल्दी झड़ गई|इसी प्रकार से मैंने ऋतंभरा को अलग अलग आसनों में करीब 50 मिनट तक चोदा उसके बाद मेरा सब्र भी जवाब दे गया तो मैंने ऋतंभरा से कहा की मैं झड़ने वाला हूँ बताओ कहाँ निकालू अपना बीज तो उसने कहा की नहीं विशु जी चूत में मत झड़ना मैं परषों ही ऍम0 सी0 से बंद हुई हूँ अगर आपने बीज चूत में ही डाल दिया तो मैं प्रेग्नेंट हो जाउंगी इसलिए आप मेरी चूत में नहीं मेरे मुँह में अपना बीज निकलना जिससे मैं तुम्हारा बीज पी भी लूँगी|10-15 धक्कों के बाद मैंने अपना लंड ऋतंभरा की चूत से निकालकर उसके मुँह में दे दिया और फिर उसके मुँह में अपना बीज भर दिया फिर उसने मेरे लंड को तब तक चूसा जब तक मेरे बीज की एक एक बूँद नहीं निचुड़ गई|फिर मैं थकान की वजह से ऋतंभरा के ऊपर गिर पड़ा| इसी तरह से मैंने काजल एयर नौकरानी की चुदाई की और एक एक बार तीनो की गाँड भी मारी|इस काम में मुझे शाम के 4:00 बज चुके थे|जब मैं वहाँ से चलने को हुआ तो ऋतंभरा ने मुझे हज़ार हज़ार के दस नोट दिए और कहा की जब भी हमारी याद आये तो चले आना|इसके बाद उन सबने मेरे लंड का ऐसा प्रचार किया की आज मेरे पास करीब 500 से ज्यादा क्लाइंट हैं|आज मुझे कम से कम 3-4 क्लाइंट्स मिल ही जाते हैं | शालू ने मेरे रेट भी खोल दिए हैं | 2 घंटे @ 5000/-, 4 घंटे @ 8000/- & फुल नाईट @ 15000/-